SAI JHULELAL(VARUN DEV-VISHNU AVTAR) came to the Holy Earth of SINDH on VIKRAMI SAMWAT 1007(950 AD) on FRIDAY or THARUVAR or SHUKRAVAR on the day of CHETICHAND or CHANDER DARSHAN to made a stop on compelled convertions of religion by those day's ruler of Sindh Markh Shah & created a communal harmony between Hindu & Muslim communities by giving the message of oneness of GOD,without shedding even a drop of blood & that is why all communities worship LORD JHULELAL in their own way.
Monday, July 16, 2018
धुनी २
|| धुनी २ ||
साईं झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
साईं दीनदयाल...दुहलन लाल...प्रभु कृपाल जी...
आयोलाल आयोलाल आयोलाल जी....
आयोलाल साईं कीयो बेडोपार जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
पल्लेवालो अखेवालो आयोलाल जी...
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
साईं झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
धर्म रक्षक साईं झूलेलाल बन उदेरो लाल जी....
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
आयोलाल आयोलाल उदेरोलाल जी.....
दीनदयाल दुलहेलाल प्रभु कृपाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
साईं झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
साईं दीनदयाल...दुहलन लाल...प्रभु कृपाल जी...
आयोलाल आयोलाल आयोलाल जी....
आयोलाल साईं कीयो बेडोपार जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
पल्लेवालो अखेवालो आयोलाल जी...
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
साईं झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
धर्म रक्षक साईं झूलेलाल बन उदेरो लाल जी....
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
आयोलाल आयोलाल उदेरोलाल जी.....
दीनदयाल दुलहेलाल प्रभु कृपाल जी....
अमरलाल...अमरलाल...अमरलाल जी....
झूलेलाल...झूलेलाल...झूलेलाल जी....
धुनी १
|| धुनी १ ||
तू ही अमरलाल है – तू ही झूलेलाल है |
तेरे ही चरणों में मेरा मोक्षधाम है |
तू ही लालन लाल है – तू ही ज्योतियुनी वाला है |
तेरे ही चरणों में मेरा सच्चा मोक्षधाम है |
तू ही घोड़े वाला है – तू ही पल्ले वाला है |
तू ही सिंधु वाला है – तू ही गंगा वाला है |
तू ही भरूच वाला है – तू ही नर्मदे वाला है
तू ही अजमेर वाला है – तू ही बालम्बे वाला है
तू ही अमरलाल है – तू ही झूलेलाल है |
तेरे ही चरणों में मेरा मोक्षधाम है |
तू ही अमरलाल है – तू ही झूलेलाल है |
तेरे ही चरणों में मेरा मोक्षधाम है |
तू ही लालन लाल है – तू ही ज्योतियुनी वाला है |
तेरे ही चरणों में मेरा सच्चा मोक्षधाम है |
तू ही घोड़े वाला है – तू ही पल्ले वाला है |
तू ही सिंधु वाला है – तू ही गंगा वाला है |
तू ही भरूच वाला है – तू ही नर्मदे वाला है
तू ही अजमेर वाला है – तू ही बालम्बे वाला है
तू ही अमरलाल है – तू ही झूलेलाल है |
तेरे ही चरणों में मेरा मोक्षधाम है |
जाप मंत्र
|| जाप मंत्र ||
संसार पार उतार हित अवतार था |
जिसने लिया सर्वेश होकर भी नारी के सटश को तुक किया |
अमरलाल जिसका नाम है, सुखधाम है |
उस ब्रह्म को और अव्यक्त को, मम बार बार प्रणाम है |
संसार पार उतार हित अवतार था |
जिसने लिया सर्वेश होकर भी नारी के सटश को तुक किया |
अमरलाल जिसका नाम है, सुखधाम है |
उस ब्रह्म को और अव्यक्त को, मम बार बार प्रणाम है |
Saturday, July 14, 2018
साईं झूलेलाल सुंदरकांड
साईं झूलेलाल सुंदरकांड
१. जब ही अधर्म हुआ अतिभारी
दुखी जन जन ने अर्ज गुजारी
सिन्धु पे सम्मिलित हो के सारे
ईष्ट आदि वरुण से त्राहि पुकारे
हम ज़ुल्मो सितम से हुए बेहाल
हे दरया साईं आ विरद् संभाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
२. ज्यो दाव पे जान थी सब ने लगाई
जल लोक से दिव्य ब्रह्म्वाणी आयी
उफ़ानी तरंग की शिखा पे बैठे
जल ज्योति ब्रह्म आशीशते देखे
बस जगीं आशायें जन जन में अपार
जलमय पलभर में हुए प्रतिपाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
३. कर गयी कोतुक क्या लहर तूफ़ानी
स्वर मूक हुए और रुँध गयी वाणी
सुन रहे ब्रह्मवाणी इक चित इक ध्यान
निर्जीवो में जैसे आ गए हों प्राण
बरस पड़ा दृगो से प्रेमाश्रु उछाल
बंध गयी आशा कि कट चला भयकाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
४. शुभ सम्वत् दशशत तिथि सप्त मंझार
चैत्र शुक्ली द्वितीया व था थारुवार
ग्राम नसरपुर ताज और सिन्धु प्रदेश
अवतरित भये 'लाल' हरण जन जन कलेश
मधुर माखन मिश्री की भेंटा के थाल
चले सब बधाई ले सजा तत्काल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
५. ठठा नगर लौट कर आहिल है आया
जलवा है कैसा लाल का शाह को बताया
नेजाधारी तेज मुख युवक सेनानी
वह तो कोई लगता है फ़रिश्ता लासानी
पुनः भया छत्रधारी करि सिंहासन विशाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
६. देख के लश्कर वज़ीर आहिल घबराया
जाननहार ने त्यों ही सीमिट ली माया
बाअदब सुनाया मंत्री ने शाही पैगाम
कि सब सिन्धियो का हो एक ही ईमान
व एक ही पंथ होये ये सकल संसार
सिन्धुओ को समझा दो हे ज़िन्दालाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
७. तत्व की बात नाही अभग्यी ने मानी
लाल ने तिस ताहि अब भृकुटी तानी
दैवी शक्तियो को साईं आज्ञा है कीनी
त्राही त्राही उन मचा आइ दीनी
उठा तूफ़ां जल अग्नि का प्रचण्ड ज्वार
किया निरधार भी भटका के कछुकाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
८. अमर 'लाल' साईं का यह 'उदेरो' स्वरूप्
पटाक्षेप हो गया अब मनोहर अनूप
झूले में लौटे पुनः होई 'लाल' अनमोल
रत्न देवकी के भुवन में करते कलोल
नसरपुरी में पुनः प्रकटे साईं झूलेलाल
सर्वव्यापि जो हैं साईं दुळ्हे लाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
९. सिन्धु नदी में एक दिन रोहिड़ी के पास
फ़ंसी भंवर में नौका लगा होने ह्रास
भाई परमानन्द और ताहिर मच्छियारा
तड़पें रोयें न मिले कहीं कोई किनारा
कन्धा दिया अन्तर्यामी आइ तत्काल
अब डूबे नौका कैसे जब रक्षक हैं 'लाल'
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
१. जब ही अधर्म हुआ अतिभारी
दुखी जन जन ने अर्ज गुजारी
सिन्धु पे सम्मिलित हो के सारे
ईष्ट आदि वरुण से त्राहि पुकारे
हम ज़ुल्मो सितम से हुए बेहाल
हे दरया साईं आ विरद् संभाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
२. ज्यो दाव पे जान थी सब ने लगाई
जल लोक से दिव्य ब्रह्म्वाणी आयी
उफ़ानी तरंग की शिखा पे बैठे
जल ज्योति ब्रह्म आशीशते देखे
बस जगीं आशायें जन जन में अपार
जलमय पलभर में हुए प्रतिपाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
३. कर गयी कोतुक क्या लहर तूफ़ानी
स्वर मूक हुए और रुँध गयी वाणी
सुन रहे ब्रह्मवाणी इक चित इक ध्यान
निर्जीवो में जैसे आ गए हों प्राण
बरस पड़ा दृगो से प्रेमाश्रु उछाल
बंध गयी आशा कि कट चला भयकाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
४. शुभ सम्वत् दशशत तिथि सप्त मंझार
चैत्र शुक्ली द्वितीया व था थारुवार
ग्राम नसरपुर ताज और सिन्धु प्रदेश
अवतरित भये 'लाल' हरण जन जन कलेश
मधुर माखन मिश्री की भेंटा के थाल
चले सब बधाई ले सजा तत्काल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
५. ठठा नगर लौट कर आहिल है आया
जलवा है कैसा लाल का शाह को बताया
नेजाधारी तेज मुख युवक सेनानी
वह तो कोई लगता है फ़रिश्ता लासानी
पुनः भया छत्रधारी करि सिंहासन विशाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
६. देख के लश्कर वज़ीर आहिल घबराया
जाननहार ने त्यों ही सीमिट ली माया
बाअदब सुनाया मंत्री ने शाही पैगाम
कि सब सिन्धियो का हो एक ही ईमान
व एक ही पंथ होये ये सकल संसार
सिन्धुओ को समझा दो हे ज़िन्दालाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
७. तत्व की बात नाही अभग्यी ने मानी
लाल ने तिस ताहि अब भृकुटी तानी
दैवी शक्तियो को साईं आज्ञा है कीनी
त्राही त्राही उन मचा आइ दीनी
उठा तूफ़ां जल अग्नि का प्रचण्ड ज्वार
किया निरधार भी भटका के कछुकाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
८. अमर 'लाल' साईं का यह 'उदेरो' स्वरूप्
पटाक्षेप हो गया अब मनोहर अनूप
झूले में लौटे पुनः होई 'लाल' अनमोल
रत्न देवकी के भुवन में करते कलोल
नसरपुरी में पुनः प्रकटे साईं झूलेलाल
सर्वव्यापि जो हैं साईं दुळ्हे लाल
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
९. सिन्धु नदी में एक दिन रोहिड़ी के पास
फ़ंसी भंवर में नौका लगा होने ह्रास
भाई परमानन्द और ताहिर मच्छियारा
तड़पें रोयें न मिले कहीं कोई किनारा
कन्धा दिया अन्तर्यामी आइ तत्काल
अब डूबे नौका कैसे जब रक्षक हैं 'लाल'
जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||
प्रार्थना तथा अरदास
प्रार्थना तथा अरदास
श्री अमर लाल जी
श्री अमर तव शरण सच्चा उडेरा, शरण दी लज्जा तैंकू |
डाढा समां लगा कलयुग दा, हरी दा नाम दे मैकूं |
तू लाल स्वरूपी सदा निहाला, निस दिन सिमरां तैंकू |
सुन्दर सेवक बिन लाल उडेरा, प्रभु होर न जाना कैकुं |
मैं विच गुनाह तकसीर उडेरा, साईं तू नाम दी लज्ज चा पाली |
बख्श गुनाह भई गुस्ताखी, साईं तू अपना विरद् च पालीं |
हाल हीला सब तैंकू मालूम, इहां आपदा सब चा टाली |
सुन्दर सेवक शरण उडेरा, सदा दृष्टि कृपा कर पालीं |
लख अपराध करे जो सेवक, बहुर करीं सतारी |
तुझ बिन और नहीं कोई दूजा, साईं मैं किस दी आस अधारी |
अपना नाम दिवाईं जिंदपीर उडेरा, साईं मैं तेरा नाम चितारी |
सुन्दर सेवा रख नाम दी लज्जा, विरद् की लाज सम्भारी |
‘पुनः शब्द दी लाली खुल रही खुल लाली’ |
गुरु कूं मिली सही कर देखां, नित्य दर्शन लाल दिखावीं |
उन बिन नही चांदना होसी, तोरे कोटि फिरे जप माली |
सुन्दर सेवक गुरु दी करुणा, सदा पूर्ण कृपा निराली |
श्री लाल उडेरा तेरी लाल कमानी, तेरा घोड़ा वी लाल दिसीवे |
वस्त्र भी लाल, लाल भी लाल, शोभा मन धरीवे |
सुन्दर लाल, लाल भी सुन्दर, लाल देखे नित जीवे |
श्री लाल उडेर तू लाल कहावीं, सुन्दर लाली लाला |
वस्त्र भी लाल लाल भी लाल, शोभा बनी विशाला |
सुन्दर नयन अलक अरु, कुण्डल सूरज झाला |
लटकल ग्रीवा ते प्रभु जी तोरे, तेरे गल मोतियन की माला |
दासन दास सदा चिर जीवो, श्री लाल उडेरा मेरा लाल करोले वाला |
इहां आस दास की आहे जो दर्शन लाल दिखावीं |
दे दर्शन नित्य चरण ही सेवूं, धिलसा दूर करावीं |
इह जो जोड़ सुदामे वाला, तीवें जोड़ चा जुड़ावीं |
सुन्दर सेवक शरण उडेरा, सब दुःख दूर करावीं |
परम भाग सेवक बड़भागी, जिन्ह लाल दा दर्शन पाया |
दर्शन पाय होये कुल तीर्थ, कोटि तीर्थ फल पाया |
जन्म जन्म भय कोई नहीं, जिन्ह ह्रदय में दर्शन पाया |
सुन्दर सतगुरु साहिब डिठा, जिन्ह लाल जने सत् गाया |
औखियां वेले आई उडेरा, सेवक कम पियाई |
भक्तां दी लाज एवें चा रखी, जिवें द्रौपदी दी लाज रखयोई |
शरण पद्यो प्रहलाद छुड़ायो, जिवें हिरण्यकश्यप बेदियोई |
सुन्दर सेवक किस डर जाऊं उडेरा, मैं तेरे दमन तले पियोई,
साईं मैं तेरे दमन तले पियोई ||
अरदास:-
जय जय जिन्दा श्री गुरुदेव बारम्बार करूं प्रणाम |
सुर नर मुनि जन पार ना पावें, सन्त जन धारें ध्यान |
जोत स्वरुप, अकाल मूर्ति, इश्वर अजूनी अंतरयामी |
विशबम्भर तू विश्व का पालक, विश्वनाथ तू विश्व का स्वामी |
श्री वरुण देव वरदायक हो तुम, विष्णु रूप होई सर्वव्यापक |
हिरणयाक्षप सहाइ पृथ्वी माता जल पर थापी |
त्रिलोकीनाथ, दीनानाथ, तू सर्व का स्वामी |
आदि पुरुष तुम वरुण देव हो भक्तन के रक्ष पाल स्वामी |
सब सन्त ब्राह्मण शरण पड़े हैं, तव चरण कमल चित्त धारी |
पलो पाए आशीर्वाद मांगे, सब सेवक सदा सुखारी |
चौ॰- साचा नाम तेरा तू शहन-शाह, श्री हाजरा हजूर तू बेपरवाह |
करूं अब अरदास, सतगुरु तुमरे पास, हमरे कारज होवन सकले रास |
ठक्कर पुगर साईं कृपा कीजे, दास जन चित्त चरणन दीजे |
दोहा-
ठक्कर पुगर जी बेनती, निज सेवक बख्शो भूल,
कर अरदास आशीर्वाद मांगू, सच्ची दरगाह विच होवे कबूल ||
जय जय विष्णु देव जलराई, जय जय शिखर सागर जलशाई |
शिखारायण जय सागर स्वामी, जन्म नसरपुर अन्तर्यामी |
जय जय दुष्ट संहारक लाल, जय जय हिन्दू करी प्रतिपाल |
जय जय धर्म रक्षक धरणीधर, जय जय रोग नाशक धनवंतर |
तेरा अंत ना पारावार, पुगर जावें बली बली हार |
जयकारा- बोले सो फल लेव- सत् सत् श्री वरुण देव |
बोले सो अक्षय- श्री अमर ‘लाल’ की जय |
बोले सो अवधूत- जय जय ज्योति स्वरुप ||
जय जय जलदेव, वरुण सुख सागर |
जगमग ज्योति जले उजियागर ||
नमः जोत प्रकाशमय चेतन जल को रूप |
अगम अगाध अपार है सहज सरूप अनूप ||
नमस्कार गुरुदेव प्रति सर्वव्यापक सोई |
जल थल माहि पूरन सकल तिस बिन और न कोई ||
विघ्न हरे मंगल करे सर्व करें कल्याण |
घर बहार रक्षा करे श्री अमर लाल भगवान ||
जय जय जय जल के देवता जय जय ज्योति स्वरुप |
श्री अमर उदेरो लाल जय श्री झूले लाल अनूप ||
कहों कहा महिमा अनन्त सतगुरु कहत कहहि |
श्री अमर लाल अस्तुति कछु कहत बखानो ताहि ||
श्री वरुण देव ज्योति स्वरुप, सकल सृष्टी आधार |
जिसको मैं वंदन करूं, जो हैं मोक्ष भोग दातार ||
श्री अमर लाल जी
श्री अमर तव शरण सच्चा उडेरा, शरण दी लज्जा तैंकू |
डाढा समां लगा कलयुग दा, हरी दा नाम दे मैकूं |
तू लाल स्वरूपी सदा निहाला, निस दिन सिमरां तैंकू |
सुन्दर सेवक बिन लाल उडेरा, प्रभु होर न जाना कैकुं |
मैं विच गुनाह तकसीर उडेरा, साईं तू नाम दी लज्ज चा पाली |
बख्श गुनाह भई गुस्ताखी, साईं तू अपना विरद् च पालीं |
हाल हीला सब तैंकू मालूम, इहां आपदा सब चा टाली |
सुन्दर सेवक शरण उडेरा, सदा दृष्टि कृपा कर पालीं |
लख अपराध करे जो सेवक, बहुर करीं सतारी |
तुझ बिन और नहीं कोई दूजा, साईं मैं किस दी आस अधारी |
अपना नाम दिवाईं जिंदपीर उडेरा, साईं मैं तेरा नाम चितारी |
सुन्दर सेवा रख नाम दी लज्जा, विरद् की लाज सम्भारी |
‘पुनः शब्द दी लाली खुल रही खुल लाली’ |
गुरु कूं मिली सही कर देखां, नित्य दर्शन लाल दिखावीं |
उन बिन नही चांदना होसी, तोरे कोटि फिरे जप माली |
सुन्दर सेवक गुरु दी करुणा, सदा पूर्ण कृपा निराली |
श्री लाल उडेरा तेरी लाल कमानी, तेरा घोड़ा वी लाल दिसीवे |
वस्त्र भी लाल, लाल भी लाल, शोभा मन धरीवे |
सुन्दर लाल, लाल भी सुन्दर, लाल देखे नित जीवे |
श्री लाल उडेर तू लाल कहावीं, सुन्दर लाली लाला |
वस्त्र भी लाल लाल भी लाल, शोभा बनी विशाला |
सुन्दर नयन अलक अरु, कुण्डल सूरज झाला |
लटकल ग्रीवा ते प्रभु जी तोरे, तेरे गल मोतियन की माला |
दासन दास सदा चिर जीवो, श्री लाल उडेरा मेरा लाल करोले वाला |
इहां आस दास की आहे जो दर्शन लाल दिखावीं |
दे दर्शन नित्य चरण ही सेवूं, धिलसा दूर करावीं |
इह जो जोड़ सुदामे वाला, तीवें जोड़ चा जुड़ावीं |
सुन्दर सेवक शरण उडेरा, सब दुःख दूर करावीं |
परम भाग सेवक बड़भागी, जिन्ह लाल दा दर्शन पाया |
दर्शन पाय होये कुल तीर्थ, कोटि तीर्थ फल पाया |
जन्म जन्म भय कोई नहीं, जिन्ह ह्रदय में दर्शन पाया |
सुन्दर सतगुरु साहिब डिठा, जिन्ह लाल जने सत् गाया |
औखियां वेले आई उडेरा, सेवक कम पियाई |
भक्तां दी लाज एवें चा रखी, जिवें द्रौपदी दी लाज रखयोई |
शरण पद्यो प्रहलाद छुड़ायो, जिवें हिरण्यकश्यप बेदियोई |
सुन्दर सेवक किस डर जाऊं उडेरा, मैं तेरे दमन तले पियोई,
साईं मैं तेरे दमन तले पियोई ||
अरदास:-
जय जय जिन्दा श्री गुरुदेव बारम्बार करूं प्रणाम |
सुर नर मुनि जन पार ना पावें, सन्त जन धारें ध्यान |
जोत स्वरुप, अकाल मूर्ति, इश्वर अजूनी अंतरयामी |
विशबम्भर तू विश्व का पालक, विश्वनाथ तू विश्व का स्वामी |
श्री वरुण देव वरदायक हो तुम, विष्णु रूप होई सर्वव्यापक |
हिरणयाक्षप सहाइ पृथ्वी माता जल पर थापी |
त्रिलोकीनाथ, दीनानाथ, तू सर्व का स्वामी |
आदि पुरुष तुम वरुण देव हो भक्तन के रक्ष पाल स्वामी |
सब सन्त ब्राह्मण शरण पड़े हैं, तव चरण कमल चित्त धारी |
पलो पाए आशीर्वाद मांगे, सब सेवक सदा सुखारी |
चौ॰- साचा नाम तेरा तू शहन-शाह, श्री हाजरा हजूर तू बेपरवाह |
करूं अब अरदास, सतगुरु तुमरे पास, हमरे कारज होवन सकले रास |
ठक्कर पुगर साईं कृपा कीजे, दास जन चित्त चरणन दीजे |
दोहा-
ठक्कर पुगर जी बेनती, निज सेवक बख्शो भूल,
कर अरदास आशीर्वाद मांगू, सच्ची दरगाह विच होवे कबूल ||
जय जय विष्णु देव जलराई, जय जय शिखर सागर जलशाई |
शिखारायण जय सागर स्वामी, जन्म नसरपुर अन्तर्यामी |
जय जय दुष्ट संहारक लाल, जय जय हिन्दू करी प्रतिपाल |
जय जय धर्म रक्षक धरणीधर, जय जय रोग नाशक धनवंतर |
तेरा अंत ना पारावार, पुगर जावें बली बली हार |
जयकारा- बोले सो फल लेव- सत् सत् श्री वरुण देव |
बोले सो अक्षय- श्री अमर ‘लाल’ की जय |
बोले सो अवधूत- जय जय ज्योति स्वरुप ||
जय जय जलदेव, वरुण सुख सागर |
जगमग ज्योति जले उजियागर ||
नमः जोत प्रकाशमय चेतन जल को रूप |
अगम अगाध अपार है सहज सरूप अनूप ||
नमस्कार गुरुदेव प्रति सर्वव्यापक सोई |
जल थल माहि पूरन सकल तिस बिन और न कोई ||
विघ्न हरे मंगल करे सर्व करें कल्याण |
घर बहार रक्षा करे श्री अमर लाल भगवान ||
जय जय जय जल के देवता जय जय ज्योति स्वरुप |
श्री अमर उदेरो लाल जय श्री झूले लाल अनूप ||
कहों कहा महिमा अनन्त सतगुरु कहत कहहि |
श्री अमर लाल अस्तुति कछु कहत बखानो ताहि ||
श्री वरुण देव ज्योति स्वरुप, सकल सृष्टी आधार |
जिसको मैं वंदन करूं, जो हैं मोक्ष भोग दातार ||
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