Saturday, July 14, 2018

साईं झूलेलाल सुंदरकांड

साईं झूलेलाल सुंदरकांड 

‌१. जब ही अधर्म हुआ  अतिभारी
   दुखी जन जन ने अर्ज गुजारी
   सिन्धु पे सम्मिलित हो के सारे
   ईष्ट आदि वरुण से त्राहि पुकारे
   हम ज़ुल्मो सितम से हुए बेहाल
   हे दरया साईं आ विरद् संभाल
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

२. ज्यो दाव पे जान थी सब ने लगाई
   जल लोक से दिव्य ब्रह्म्वाणी आयी
   उफ़ानी तरंग की शिखा पे ‌बैठे  
   जल ज्योति ब्रह्म आशीशते देखे
   बस जगीं आशायें जन जन में अपार
   जलमय  पलभर में हुए प्रतिपाल
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

३. कर गयी कोतुक  क्या लहर तूफ़ानी
    स्वर मूक हुए और रुँध गयी वाणी
   सुन रहे ब्रह्मवाणी इक चित इक ध्यान
   निर्जीवो में जैसे आ गए हों प्राण
   बरस पड़ा दृगो से प्रेमाश्रु उछाल
   बंध गयी आशा कि कट चला भयकाल
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||


४. शुभ सम्वत् दशशत तिथि सप्त मंझार
   चैत्र शुक्ली द्वितीया व था थारुवार    
   ग्राम नसरपुर ताज और सिन्धु प्रदेश
   अवतरित भये 'लाल' हरण जन जन कलेश
   मधुर माखन मिश्री की भेंटा के थाल
   चले सब बधाई ले सजा तत्काल
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

५. ठठा नगर लौट कर आहिल है आया
    जलवा है कैसा लाल का शाह को बताया
    नेजाधारी तेज मुख युवक सेनानी
    वह तो कोई लगता है फ़रिश्ता लासानी
    पुनः भया छत्रधारी करि सिंहासन विशाल
    जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
    जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

६. देख के लश्कर वज़ीर आहिल घबराया
  जाननहार ने त्यों ही सीमिट ली माया
  बाअदब सुनाया मंत्री ने शाही पैगाम
  कि सब सिन्धियो का हो एक ही ईमान
  व एक ही पंथ होये ये सकल संसार
  सिन्धुओ को समझा दो हे ज़िन्दालाल
  जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

७. तत्व की बात नाही अभग्यी ने मानी
  लाल ने तिस ताहि अब भृकुटी तानी
  दैवी शक्तियो को साईं आज्ञा है कीनी
  त्राही त्राही उन मचा आइ दीनी
  उठा तूफ़ां जल अग्नि का प्रचण्ड ज्वार
  किया निरधार भी भटका के कछुकाल
  जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
  जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

८. अमर 'लाल' साईं का यह 'उदेरो' स्वरूप्
   पटाक्षेप हो गया अब मनोहर अनूप
   झूले में लौटे पुनः होई 'लाल' अनमोल
   रत्न देवकी के भुवन में करते कलोल
   नसरपुरी में पुनः प्रकटे साईं झूलेलाल
   सर्वव्यापि जो हैं साईं दुळ्हे लाल
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

९. सिन्धु नदी में एक दिन रोहिड़ी के पास
   फ़ंसी भंवर में नौका लगा होने ह्रास
   भाई परमानन्द और ताहिर मच्छियारा  
   तड़पें रोयें न मिले कहीं कोई किनारा
   कन्धा दिया अन्तर्यामी आइ तत्काल
   अब डूबे नौका कैसे जब रक्षक हैं 'लाल'
   जय झूलेलाल साईं जय झूलेलाल
   जय झूलेलाल जय जय अमरलाल ||

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