|| छंद ||
भीड़ पड़ी पंचम सकल, अमरलाल शरण जाये पड़ी |
जंजू टिके की रखे लज्या, इस विध सकल पुकार करी |
वृद्ध की लज्या राखो साहिब, कौन साहिब तुझ बिन अवरी |
सतयुग द्वापर त्रेता माहो, दीनन तुम अवतार धरी |
जब जब असुरन ते दुःख पायो, तब तब ही तुम विपत हरी |
कलु काल में रखिया कीनी, दरश तुम्हारे पाप टरी |
कानों में कुण्डलखूब विराजे, मृग राजे ज्यों नैन करी |
कट पट पाग माथे पर कलगी, जग मग झालर लाल जड़ी |
लाल भाल पे तिलक बिराजे, गल में मोतियन हारि परि |
बाहिन भवट्टे सुन्दर लटके, निर्खत से मन जाय ठरी |
हम हुंभय कृतार्थ स्वामी, शरण पड़े आये तुमरी |
क्या मुख शोभा आख सुनावा, गात गात मत जाये बिसरी |
गगनन घोड़न की असवारी, बाना लाल गुलाल झड़ी |
लाल सरुप अनूप अमर दा, क्या मति शोभा जाए करी |
इस प्रकार जो ध्यान धरेगा, सोई कोई पावे का अमर पुरी |
बुद्ध सिंह आये पड़ो तुम सरनी, दूर ना होवे एक पल घड़ी |
बाबा दूर ना होवो इक पल घड़ी, दूर ना होवो इक पल घड़ी | |
भीड़ पड़ी पंचम सकल, अमरलाल शरण जाये पड़ी |
जंजू टिके की रखे लज्या, इस विध सकल पुकार करी |
वृद्ध की लज्या राखो साहिब, कौन साहिब तुझ बिन अवरी |
सतयुग द्वापर त्रेता माहो, दीनन तुम अवतार धरी |
जब जब असुरन ते दुःख पायो, तब तब ही तुम विपत हरी |
कलु काल में रखिया कीनी, दरश तुम्हारे पाप टरी |
कानों में कुण्डलखूब विराजे, मृग राजे ज्यों नैन करी |
कट पट पाग माथे पर कलगी, जग मग झालर लाल जड़ी |
लाल भाल पे तिलक बिराजे, गल में मोतियन हारि परि |
बाहिन भवट्टे सुन्दर लटके, निर्खत से मन जाय ठरी |
हम हुंभय कृतार्थ स्वामी, शरण पड़े आये तुमरी |
क्या मुख शोभा आख सुनावा, गात गात मत जाये बिसरी |
गगनन घोड़न की असवारी, बाना लाल गुलाल झड़ी |
लाल सरुप अनूप अमर दा, क्या मति शोभा जाए करी |
इस प्रकार जो ध्यान धरेगा, सोई कोई पावे का अमर पुरी |
बुद्ध सिंह आये पड़ो तुम सरनी, दूर ना होवे एक पल घड़ी |
बाबा दूर ना होवो इक पल घड़ी, दूर ना होवो इक पल घड़ी | |
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